पावन तव चरण
( राग : सारंग ; ताल : एकताल )
पावन तव चरण स्मरण ।
ध्यान धरत विघ्न - हरण ॥ टेक ॥
सबका है अनुभव ये ,
संत पंथ मत गाये ।
सुनकर मत दौरत है ,
कहत जात नमन ॥१ ॥
शीतल मन शान्त विषय ,
निर्भयपद अविचल ये ।
जन्म - मरण दुःख - रहित ,
पद पावे सज्जन - जन ॥ २ ॥
यह सबकी सोच - समझ ,
ध्याये तब चरण सहज ।
तुकड्या कहे , तन्मय हो ,
स्वाँस - स्वाँस गाये मन ॥ ३ ॥
गुरुकुंज आश्रम ;
दि . १०-५-६२
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